22 दिसंबर, 2009

ये है मनसे !

http://www.youtube.com/watch?v=OlCSr2nAzzs
आज मंगलवार को सुबह सुबह दफ्तर पहुंची... दफ्तर पहुचने के साथ खबरों का सफर शुरु हो गया... पहली खबर थी एमएनएस की गुंडागर्दी.... खबर ये थी कि एमएनएस के कार्यकर्ताओं ने सिद्विविनायक मंदिर के पास साधुओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा... एमएनएस की गुंडागर्दी ये खबर अब आम हो चुकी है... लेकिन सोते हुए साधुओं की पिटाई करना... ये सुनकर और दृष्य देखकर मन पसीज गया... जब हम गुलाम थे.. तब अंग्रेजों ने ऐसा ही जुल्म भारतीयों पर ढहाया होगा... जो आज एमएनएस के कार्यकर्ता ढहा रहे हैं...

महाराष्ट्र को अपनी जागीर समझने वाले गुंडे तब कहा थे जब प्रदेश की राजधानी मुम्बई आतंकी खतरे से लहुलुहान हो रही थी... तब ये ठेकेदार कहीं बिल में जाकर छुप गए थे... क्योंकि उस वक्त इनसे भी बड़ा गुंडा इन्ही के घर को ध्वस्त करने की कोशिश कर रहा था... तब अगर आतंक से कोई लड़ रहा था... तो वो था आम आदमी... तो फिर जब देश में शांति होती है... तो फिर क्यों ये क्षेत्रवाद की चिंगारी से देश की एकता को जलाने की कोशिश करते हैं... हालाकि हर बार ये गुंडे अपने नापाक मंसूबों को सच नहीं कर पाते... लेकिन कुछ बेकसूर इनकी चपेट में जरुर आ जाता है... कभी ये मराठी भाषा के नाम पर देश को राज्यों में बांटने की कोशिश करते हैं... तो कभी सेब्रिटी को निशाना बनाकर पब्लिसिटी हासिल करने की कोशिश... इतना ही नहीं उत्तर भारतियों के नाम पर तो राजनीति रोटी सेकी जा रही है... मनसे की कायरता की दास्तां यहीं खत्म नहीं होती... कुछ दिनों पहले उसने अपना निशाना एक निजी चैनल के दफ्तर को भी बनाया था... और तो और एसेबंली की मरियादा को तोड़ने से ये नहीं चूके... और आज निहत्थे साधुओं से मारपीट कर वो अपनी झूठी शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है... लेकिन ये उसका डर है... कायरता है... डर है कि कहीं कोई और उसकी गद्दी न छीन ले... और कायरता इसलिए... जब महाराष्ट्र को अपने सैनिकों की जरुरत थी... तो मराठी प्रेम का राग अलापने वाले ही बिल में जाकर छुप गए... और उन जवानों ने गोली खाई जिनके अपने कभी उन कायरों के लाठी डंडों का शिकार हुए थे... क्योंकि ये लड़ाई किसी प्रदेश की नहीं बल्कि देश की थी... देश का एक हिस्सा छलनी हो रहा था... और उसे बचाने के लिए देश के सच्चे जवान शहीद हो गए...


मै नमन करती हूं... उन वीर जवानों को जिनकी बदौलत आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं... और उन कायरों के लिए मेरे पास कोई शब्द ही नहीं... क्योंकि वो केवल हिंसा की भाषा जानते हैं...

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