जीत की खुशी?
आज का दिन है असत्य पर सत्य की जीत का॥ आज के दिन भगवान राम ने रावण को मारकर असत्य पर जीत हासिल... और अधर्म की खात्मा हुआ था... कहने को तो आज भी हर साल जीत की खुशी मनाई जाती है॥ और असत्य यानि रावण का पुतला फूंका जाता है... लेकिन क्या वाकई इस पुतले को फूंकने के बाद असत्य समाप्त हो जाता है... बरसों पुरानी चली आ रही इस परंपरा को हम केवल परंपरा के रुप में ही मना रहे हैं॥ और हमेशा यूं ही मनाते रहेंगे... लेकिन आज की हकीकत तो ये है कि हर शहर गांव और मोहल्ले में ऐसे कई रावण हैं जिसने सामाज में गंद पैदा कर दी है॥ जरुरत है तो ऐसे रावणों का दहन करने की॥ जो आतंक के रुप में है.. या फिर लड़कियों और महिलाओं पर अत्याचार करने वाला शख्स भी रावण है... अमीरी का जोश लिए जो कानून ढेंगे पर लेकर घूमता है वो भी रावण है.. और वो भी रावण है जो कानून का रक्षक होते हुए भी दीमक की तरह कानून की तख्ती को चाट खाता है... और वो हर शख्स जो भ्रष्टाचार में लिप्त है रावण है... इन रावणों को खत्म कर सत्य की जीत नहीं होगी... बल्कि जरुरत है इनके अंदर उपजे रावण को खत्म करने की... जिससे भ्रष्टाचार, अत्याचार, हिंसा और अमीरी गरीबी की जड़ खत्म हो जाए... और हमारा देश भारत त्रेतायुग जैसा हो जाएगा... और देश में किसी विशेष समाज, व्यक्ति का राज नहीं बल्कि राम राज होगा...


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