
स्वतन्त्रता दिवस के पावन अपसर पर
अड़चने
अड़चने
आज भी हमारे सामने हैं बहुत सी अड़चनें
और देश को विकसित करने में बहुत कठिनाइयां
देश के विद्रोही, विद्रोह करते थकते नहीं
और अपने कुकर्म को कुकर्म समझते नहीं
आज भी हमारे सामने..........................................
देश को उंचा उठाने का प्रयास किया नहीं
और गरीबों के लिए ले आए भुखमरी
साधु सा बनावटी वेश अपने से अलग किया नहीं
माल ऐठते हुई ना धौ, ऐसा कुकर्म करते रहे
आज भी हमारे सामने.............................................

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें