10 अगस्त, 2008


स्वतन्त्रता दिवस के पावन अपसर पर

अड़चने

आज भी हमारे सामने हैं बहुत सी अड़चनें

और देश को विकसित करने में बहुत कठिनाइयां

देश के विद्रोही, विद्रोह करते थकते नहीं

और अपने कुकर्म को कुकर्म समझते नहीं

आज भी हमारे सामने..........................................

देश को उंचा उठाने का प्रयास किया नहीं

और गरीबों के लिए ले आए भुखमरी

साधु सा बनावटी वेश अपने से अलग किया नहीं

माल ऐठते हुई ना धौ, ऐसा कुकर्म करते रहे

आज भी हमारे सामने.............................................

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