10 अगस्त, 2008


स्वतन्त्रता दिवस के पावन अपसर पर

अड़चने

आज भी हमारे सामने हैं बहुत सी अड़चनें

और देश को विकसित करने में बहुत कठिनाइयां

देश के विद्रोही, विद्रोह करते थकते नहीं

और अपने कुकर्म को कुकर्म समझते नहीं

आज भी हमारे सामने..........................................

देश को उंचा उठाने का प्रयास किया नहीं

और गरीबों के लिए ले आए भुखमरी

साधु सा बनावटी वेश अपने से अलग किया नहीं

माल ऐठते हुई ना धौ, ऐसा कुकर्म करते रहे

आज भी हमारे सामने.............................................

03 अगस्त, 2008


नन्ही कली

एक रात एक नन्ही कली मेरे पास आई थी


कहना चाहती थी कुछ पर कह ना पाई थी


सार्म्थय इतना ना बटोर सकी कि अपने भाव प्रकट कर सके


पर वो अपनी इच्छा रोक ना पई थी


कहने को तो शब्द भण्डार बहुत था,


लेकिन भाव भण्डार गृह खाली था।


तभी श्वेत का बीजारोपण हुआ


रात्री अपने ही अंधकार में डूबने वाली थी


कि छोटी कली पहले ही ओझल हो गई


वो कुछ कह ना पाई थी


क्योकिं वो इतना सार्म्थय बटोर ना पाई थी।


छोटी नहीं कली अपने को रोक ना पाई थी।


हैप्पी फ्रेंड शिप डे.... मेरे तमाम दोस्तों को आज में शुक्रिया अदा करती हू उस साथ के लिए जब मै तनहा थी। अकेले थी। दोस्ती किसी दिन की मोहताज नहीं कि उसे उस दिन मनाकर अलविदा कर दिया जाए। दोस्ती एक एहसास है जो हर पल महसूस किया जाता है।