09 दिसंबर, 2010
23 नवंबर, 2010
"यहां सब बिकाऊ है"
व्यवसाय बनती जा रही है पत्रकारिता... ये बात सबसे सुनी थी... लेकिन यकीं नहीं था... और आंखे तब खुली जब ये सब कुछ मेरे सामने हो रहा था... हालाकि पत्रकारिता का मामूली सा अनुभव है... लेकिन जब पत्रकारिता के मैदान में कदम रखा तो एक साल उसे समझने में लग गए... उपर से तो मैदान में बिछी हरी घास की तरह हरियाली नजर आती है... लेकिन जब अंदर झांक कर देखा तो हकीकत सामने आ गई... खबरों को कैसे बेचा और खरीदा जाता है... एक साल के बाद इसका अनुभव भी हो गया... ना चाहते हुए भी मजबूरी में खबरों का सौदा करना पड़ा... करती भी क्या... एक अदना सा कर्मचारी और कर भी क्या सकता है... बस बॉस का आदेश मानकर काम करते रहे... और पत्रकारिता के लिए जो सम्मान था उस पर अब शक होने लगा... महज तीन सालों में जीवन की सच्चाई सामने आ गई... ये किस्सा महज पत्रकारिता का ही नहीं है... आज की दुनिया मे सब बिकाऊ है... चाहे दुकान में मिलने वाला राशन हो... या फिर नेताओं की कुर्सी... सबका सौदा होता है... और व्यवसाय में तो प्रोफिट ही मकसद होता है... फिर चाहे किसी अपने को नुकसान क्यों ना हो रहा हो... क्या फर्क पड़ता है... प्रोफिट तो मिल रहा है न... और यही मकसद भी है। तो फिर पत्रकारिता पर ही प्रश्नचिन्ह क्यों। देश की रक्षा की शपथ लेने वाले भी तो शहीदों की शहादत के नाम पर व्यवसाय कर रहे हैं... सेवा के नाम पर राजनीति का सुख भोग रहे नेताओं ने तो सबको पीछे छोड़ दिया है... अपनी ताकत का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते हैं... छोटे छोटे भ्रष्टाचार के खिलाफ हर कोई उंगली उठाता है... लेकिन सफेदपोश धोखेबाजों के लिए जिंदाबाद के नारे लगाते हुए लाखों हाथ खड़े मिलते हैं... ये अलग बात है कि इनमें से कई हाथों का मोल भाव किया जाता है... छोटे मोटे भ्रष्टाचार तो पनपते हैं और खत्म हो जाते हैं... लेकिन सालों से चले आ रहे घपलों पर नजर तो सबकी है... लेकिन कोई उसे देखने की हिम्मत नहीं जुटा पाता... ऐसे कई मामले हैं जो अदालत की चौखट तक तो पहुंच गए हैं... लेकिन दोषियों को सजा देने में न्याय प्रणाली भी कुछ खास नहीं कर पाई... मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि यहां सब कुछ बिकाऊ है।
30 जनवरी, 2010
फिर याद आए बापू
मोहनदास करमचंद्र गांधी एक ऐसा नाम जिसने भारत में क्रांति पैदा कर दी... वैसे देश में क्रांति लाने वाले और भी कई लोग थे॥ लेकिन गाँधी का क्रांति लाने का माध्यम सबसे अलग और निराला था॥ सत्य, अहिंसा के पथ पर चलकर महात्मा गांधी ने हमें आजाद कराया... मोहनदास करमचंद्र गांधी को महात्मा शब्द रविंद्र नाथ टैगोर ने दिया था... महात्मा का मतलब महान आत्मा से है... भारत में उन्हें बापू के नाम से भी याद किया जाता है... गुजराती में बापू का मतलब पिता होता है... बापू को राष्ट्रपिता का सम्मान दिया गया... ये तो कुछ ऐसी बातें हैं जो हर कोई शख्स जानता है... लेकिन मेरी नजर में बापू वो प्रतिमा है॥ तो चुप और खामोश रहकर भी जीने की जज्बा देता है... दूसरों की मदद करने की प्रेरणा देता है... जो कभी न हार मानने का पाठ सिखाता है... बापू ने न केवल अमीर और उचे तबके के लिए काम किया... बल्कि दलित, ग्रामीण और बेसहारा लोगों को भी सहारा दिया... किसानों के लिए बापू ढ़ाल बने, दलितों पर होने वाले भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई, और पूरे देश को आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए एकजुट किया... अपनी पोशाक सादी धोती और सूती की शॉल उन्होंने चरखे से कातकर खुद बनाई थी... सादा भोजन करने वाले बापू सीधे और सरल व्यवहार के थे... देश के ऐसे सच्चे वीर को मेरा शत शत नमन...
10 जनवरी, 2010
अमर का नया खेल

अमर सिंह समाजवादी पार्टी के कर्ताधर्ता मुलायम सिंह यादव से खफा हैं... अमर के इस्तीफे से तो यही लगता है... अमर सिंह ने एसपी के महासचिव पद के साथ संसदीय बोर्ड समेत सभी पदों से बाय-बाय कह दिया है... अमर सिंह ने एक बयान में कहा है कि “ राजनीति से मेरा मन दुखी हो गया है ” इसके अलावा निजी चैनल से बातचीत के दौरान अमर सिंह ने इस्तीफे का कारण खराब सेहत बताया... अमर के इस्तीफे से संजय दत्त का अमर प्रेम भी सबके सामने आ गया.. अमर सिंह ने पार्टी को क्या बाय-बाय कहा संजू बाबा ने भी पार्टी को आखिरी सलाम कर दिया... संजय दत्त ने पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव के बयान पर भी अफसोस जताया है... “ रामगोपाल यादव ने कहा था कि फिल्म वालों की वजह से पार्टी को कोई फायदा नहीं हुआ ” रामगोपाल के इस बयान ने पार्टी में भले ही उथलपुथल मचा दी हो... लेकिन मुलायम सिंह यादव को उम्मीद है कि सब पहले की तरह ही ठीक हो जाएगा... मुलायम सिंह यादव का कहना है कि वो जल्द ही अमर सिंह को मना लेंगे... भले ही चाहे मुलायम पार्टी का दर्द जाहिर न करें... लेकिन पार्टी में चल रही तकरार की आवाज अब बाहर भी सुनाई देने लगी है... खैर अमर का ये नया दांव को अमर ही जानें... लेकिन अमर के इस्तीफे से मुलायम की रातों की नींद जरुर उड़ गई है...
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